Thursday, December 26, 2019

क्या NPR, देशभर में NRC लाने का पहला क़दम है?- फ़ैक्ट चेक

केंद्र सरकार ने मंगलवार को नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर यानि एनपीआर को अपडेट करने और जनगणना 2021 की शुरुआत करने को मंज़ूरी दे दी है. इसके साथ ही इसपर विवाद शुरू हो गया है और कुछ लोगों का कहना है कि ये देशभर में एनआरसी लाने का पहला क़दम है. लेकिन सरकार इस दावे को ख़ारिज कर रही है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

कैबिनेट के इस फ़ैसले के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा, ''एनपीआर का नेशनल रजिस्टर ऑफ़ इंडियन सिटीज़न (एनआरआईसी) से कोई ताल्लुक़ नहीं है. दोनों के नियम अलग हैं. एनपीआर के डेटा का इस्तेमुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रहमाल एनआरसी के लिए हो ही नहीं सकता. बल्कि ये जनगणना 2021 से जुड़ा हुआ है.''

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ़्रेस में कहा कि साल 2010 में यूपीए सरकार ने पहली बार एनपीआर बनाया. उस वक़्त इस क़दम का स्वागत किया गया.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि साल 2014 से अबतक हमारी सरकार में एक बार भी एनआरसी शब्द इस्तेमाल ही नहीं किया गया. सरकार बार-बार ये सफ़ाई इसलिए दोहरा रही है क्योंकि नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर देशभर में भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और केंद्र सरकार पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि वो सीएए के बाद एनआरसी लाकर देश में मुसलमानों को नागरिकता से वंचित करना चाहती है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

बीबीसी ने एनपीआर-एनआरसी को लेकर सरकार के तमाम दावों की पड़ताल शुरू की. 31 जुलाई 2019 को गृह मंत्रालय की ओर से इसका गज़ेट जारी किया गया है. जिसमें लिखा है कि सभी राज्यों में एक अप्रैल 2020 से लेकर 30 सितंबर 2020 तक ये प्रक्रिया की जाएगी.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

हमने पाया कि साल 2010 में पहली बार एनपीआर बनाया गया. इसे 2015 में अपडेट किया गया. लेकिन एनपीआर साल 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में अस्तित्व में आया.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन करके तत्कालीन वाजपेयी सरकार ने इसमें ''अवैध प्रवासी'' की एक नई श्रेणी जोड़ी. 10 दिसंबर, 2003 को गृह मंत्रालय की ओर से जारी किए गए नोटिफ़िकेशन में साफ़ बताया गया है कि कैसे एनआरआईसी, एनपीआर के डेटा पर निर्भर होगा.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

इस एक्ट के चौथे नियम में लिखा है, ''केंद्र सरकार नेशनल रजिस्टर ऑफ़ इंडियन सिटीज़न (एनआरआईसी) के लिए देशभर में घर-घर जाकर डेटा कलेक्शन की प्रक्रिया शुरू कर सकती है. ऐसा करने के लिए रजिस्टार जनरल ऑफ़ सिटिजन रजिस्ट्रेशन की ओर से इसकी समय अवधि से जुड़ा एक आधिकारिक गज़ेट जारी किया जाएगा. पॉपुलेशन रजिस्टर में जुटाई गए हर परिवार, शख्स के डेटा को लोकल रजिस्टार सत्यापित करेगा. इस प्रक्रिया में एक या उससे अधिक लोगों का सहयोग लिया जा सकता है. इस वैरिफ़िकेशन में अगर किसी की नागरिकता पर संदेह हो तो इस जानकारी को रजिस्टार पॉपुलेशन रजिस्टर में चिन्हित करेगा. आगे की पूछताछ और सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद संदिग्ध को इस बारे में सूचित किया जाएगा.''मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

इसके अलावा पीआईबी के एक ट्वीट के मुताबिक़ 18 जून, 2014 को ख़ुद तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने निर्देश दिया कि ''एनपीआर प्रोजेक्ट को तार्किक निष्कर्ष पर ले जाया जाए जो एनआरआईसी की शुरूआत है.''मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

26 नवंबर 2014 को तत्कलीन गृहराज्य मंत्री किरेन रिरजू ने राज्य सभा में एक सवाल के जवाब में बताया था, ''नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) एक ऐसा रजिस्टर है जिसमें भारत में रहने वाले सभी लोगों का ब्यौरा होगा चाहे वो भारत के नागरिक हों या नहीं. एनपीआर नेशनल रजिस्टर ऑफ़ इंडियन सिटीजन (मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रहएनआईआरसी) की ओर पहला क़दम होगा, जिसमें हर शख़्स की नागरिकता को वैरिफ़ाई किया जाएगा. ''

इतना ही नहीं मोदी सरकार ने पहले कार्यकाल में संसद में कम से कम नौ बार ये कहा है कि देश भर में एनआरसी, एनपीआर के डेटा के आधार पर की जाएगी.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

ये सभी बयान सरकार के वर्तमान बयान से बिलकुल अलग है. आज से पहले जब भी एनपीआर का ज़िक्र किया गया है तो उसका संदर्भ नेशनल रजिस्टर ऑफ़ इंडियन सिटीजन से जुड़ा रहा है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर के लिए नाम, जन्मतिथि, लिंग, माता का नाम, पिता का नाम, जन्मस्थान जैसी जानकारियां मांगी जा रही हैं. ये जानकारियां जनगणना में भी मांगी जाती है, लेकिन बीबीसी को पश्चिम बंगाल में एनपीआर की 'प्रश्नावली' मिली है जिसमें 'माता का जन्म स्थान' पूछा जा रहा है. इस पर कई जनसांख्यिकी के जानकार सरकार की मंशा और उसके बयान के बीच विरोधाभास का सवाल उठा रहे है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

इस मामले को समझने के लिए हमने पश्चिम बंगाल के मानवाधिकार संगठन असोसिएशन फ़ॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ डेमोक्रेटिक राइट्स के सदस्य रंजीत सुर से बात की.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

उन्होंने कहा, ''गृह मंत्री देश को बेवक़ूफ़ बना रहे हैं. ये तो साफ़-साफ़ 2003 के नागरिकता (संशोधन) एक्ट में लिखा है कि एनपीआर, एनआरसी का पहला क़दम है. दरअसल, जनगणना का डेटा सरकार केवल पब्लिक पॉलिसी के लिए ही इस्तेमाल कर सकती है. ऐसे में एनपीआर के अंर्तगत जुटाया गया डेटा ही देशभर में होने वाली एनआरसी में इस्तेमाल होगा. एनपीआर दो चरणों में होगा. अभी सरकार कह रही है कि आप ख़ुद ही अपनी जानकारी दें, हमें काग़ज़ नहीं चाहिए लेकिन इसके बाद वो आपकी इस जानकारी को वैरिफ़ाई करने के लिए आपके दस्तावेज़ मांगेंगे.''मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

साल 2010 में जब यूपीए ने इसे पहली बार किया तो क्यों आपत्ति नहीं दर्ज की गई? इस सवाल के जवाब में रंजीत सुर कहते हैं, ''ये सही है कि सब ने 2010 में वो प्रतिक्रिया नहीं दी जो अब हम दे रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि लोगों को एनआरसी की जानकारी पूरी तरह नहीं थी. अब जब देश ने असम में एनआरसी देखी है तो हमें और लोगों को ये पूरा मामला समझ आ रहा है. साल 2015 में मोदी सरकार ने इसे डिजिटाइज़ किया था. वर्तमान समय में जब असम में एनआरसी लिस्ट से 19 लाख लोग बाहर हैं, नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 से देश में एक अलग माहौल बनाया गया है ऐसे में एनपीआर पर लोग जागरुक हो कर प्रतिक्रिया दे रहे हैं.''मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

कांग्रेस नेता अजय माकन साल 2010 में गृह राज्यमंत्री थे. अब वो कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार का बचाव करते हुए कहते हैं, ''हमारे एनपीआर से मोदी सरकार के एनपीआर का स्वरूप बिल्कुल अलग है.''मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

पश्चिम बंगाल और केरल सरकार ने केंद्र सरकार की मंशामुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह पर सवाल उठाते हुए राज्य में एनपीआर की प्रक्रिया रोक दी है.

गृह मंत्री क्या कह रहे हैं?मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

अमित शाह ने कहा है कि ''दोनों (केरल, प. बंगाल) मुख्यमंत्रियों से विनम्र निवेदन है कि इस प्रकार का क़दम न उठाएं. वे इस पर पुन: विचार करें. ये बंगाल और केरल की ग़रीब जनता के कल्याण के लिए बनाए जाने वाले कार्यक्रमों का आधार है. राजनीति के लिए ग़रीब जनता को डेवलपमेंट प्रोग्राम के बाहर मत रखिए. इनको जोड़ दीजिए.''मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

''NPR जनसंख्या का रजिस्टर है, ये पॉपुलेशन रजिस्टर है इसमें जो भी रहते हैं उनके नाम रजिस्टर किए जाते हैं. इसके आधार पर देश की अलग-अलग योजनाओं का आकार बनता है. एनआरसी में लोगों से दस्तावेज़ मांगे जाते हैं कि आप बताएं कि किस आधार पर आप देश के नागरिक हैं. इन दोनों प्रक्रिया का कोई लेना देना नहीं है. न ही दोनों प्रक्रिया का एक दूसरे के सर्वे में कोई उपयोग हो सकता है.''मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

''2015 में इसे पायलट लेवल पर अपडेट किया गया था. ये दस साल में की जाने वाली प्रकिया है. इस बीच देश में रहने वाली जनसंख्या में बड़ा उथल पुथल होता है. जनगणना भी दस साल में होती है. 2010 में यूपीए ने यही (एनपीआर) एक्सरसाइज किया तो किसी ने सवाल नहीं उठाया. सरकार एक फ़्री एप लाने वाली है जिसमें ख़ुद लोग अपनी जानकारी भर सकेंगे और ये स्वप्रमाणित होगा. हमें कोई काग़ज़ नहीं चाहिए.''मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

बीबीसी ने अपनी पड़ताल में पाया है कि सरकार ने अभी देशभर में एनआरसी की घोषणा नहीं की है लेकिन मौजूदा नियमों के मुताबिक़ जब भी देशभर में एनआरसी बनेगा इसके लिए एनपीआर के डेटा का ही इस्तेमाल होगा. बशर्ते सरकार नियमों में बदलाव करके एनपीआर को एनआरसी से अलग ना कर दे. लेकिन तब तकएनआरसी और एनपीआर को अलग करके देखना ग़लत है. मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

Monday, December 9, 2019

从“中美国”到新冷战:美国如何面对中国“举国体制”

美中贸易协议达成一波三折,双方正进入旷日持久的经济对抗。与此同时,美国应该如何对中国强硬,如何在竞争中战胜中国成为美国舆论关注的话题。

今年9月在韩国首尔的辩论会上,中国著名经济学者林毅夫教授与美国历史学者尼尔·弗格森(Niall Ferguson)讨论结束时打赌。林毅夫认为20年后,中国将超过美国,而弗格森则不同意中国经济会超过美国。

不过弗格森在讨论中承认,中国经历了史无前例的迅速工业化和经济增长,按照购买力评估,中国经济已经超过了美国。但弗格森指出,中国取得经济和科技成就的手段缺乏正当性,例如国家支持企业进行不公平竞争以及技术盗窃问题。

这大致反映出美国的专家和决策者对于中美竞争的讨论,其中主要的话题就是中国能否超过美国,以及应该如何对付中国的问题。

弗格森本周在《纽约时报》撰文,描述中国和美国经济共生关系的新词“中美共同体”(Chimerica)已经不反映现实,新冷战已经开始。

目前中国对美国构成的挑战具有旧冷战时期美国的主要对手苏联不具备的特点,其中主要是经济挑战。苏联从来没有像中国这样显示出强大的经济活力和科技竞争力。

美国前国家安全局局长罗杰斯(Mike Rogers)最近在广播节目中说,在冷战中苏联的挑战主要集中在政治,外交和军事方面,但是今天的中国对美国的挑战除了表现在上述方面以外,更主要的是经济能力方面的挑战。他说,历史上美国从来没有遇到过在经济能力上如此接近的竞争者。

美国媒体报道说,罗杰斯是美国政策圈最早对诸如华为和中兴这类中国技术公司的国家安全威胁发出警告的人。他在2012年就同其他人一起撰写过50页的报告,指出这些中国公司与北京共产党政府存在长期合作的关系,提醒美国情报界和国会关注华为和中兴这类中国的科技巨头。

中国国家调动资源和力量的能力被说成“举国体制”,占经济主导地位的国企被认为是政府干预经济的主要手段。中国的国企和“举国体制”一直成为美国的指责目标。

罗杰斯在讨论如何对付中国竞争的时候也强调了中国公司获得国家支持的问题,即中央控制的投资,提供缓冲保障,这都是美国公司没有的,这令中国取得对西方竞争者不平等的竞争优势。

11月初中共中央全会通过的决议强调了中国体制在1949年后以及市场经济改革后历史上的主要作用。在官方决议中,“集中力量办大事”被列为中国制度的优势。官方媒体也提到在科技创新,掌握核心技术方面,依靠举国体制优势的重要性。

Monday, December 2, 2019

गिरती जीडीपी से आम आदमी को क्या डरना चाहिए?

लगातार बुरे दौर से गुज़र रही भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं.

शुक्रवार को सामने आए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़, भारत की अर्थव्यवस्था में जुलाई से सितंबर के बीच देश का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी महज़ 4.5 फ़ीसदी ही रह गई.

यह आंकड़ा बीते 6 सालों में सबसे निचले स्तर पर है. पिछली तिमाही की भारत की जीडीपी 5 फ़ीसदी रही थी.

जीडीपी के नए आंकड़े सामने आते ही विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया.

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ''भारत की जीडीपी छह साल में सबसे निचले स्तर पर आ गई है लेकिन बीजेपी जश्न क्यों मना रही है? क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी जीडीपी (गोडसे डिवीसिव पॉलिटिक्स) से विकास दर दहाई के आंकड़े में पहुंच जाएगी.''

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी इन आंकड़ों पर चिंता जताई है और कहा है कि सरकार देश की अर्थव्यवस्था में जो बदलाव कर रही है वह बिलकुल भी मददगार साबित नहीं हो रहे.

जीडीपी के ये आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कितने ख़तरनाक हैं यही जानने के लिए बीबीसी के बिज़नेस संवाददाता अरुणोदय मुखर्जी ने बात की अर्थशास्त्री विवेक कौल से. पढ़िए उनका नज़रिया-

जीडीपी के आंकड़े दिखाते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है. अगर हम जीडीपी के अलग-अलग आंकड़ों को देखें तो विकास दर 4.5 प्रतिशत इसलिए रही है क्योंकि सरकारी ख़र्च 15.6 प्रतिशत बढ़ा है.

ऐसे में अगर हम सरकारी ख़र्च को अलग रखें और तब पूरी अर्थव्यवस्था को देखें तो हम पाएंगे कि स्थिति और भी ज़्यादा बुरी है. इस ख़र्च से अलग जो भारतीय अर्थव्यवस्था है उसकी विकास दर गिरकर लगभग तीन प्रतिशत हो गई है.

तो अभी भी जो थोड़ी-बहुत विकास दर दिख रही है वह इसलिए है क्योंकि सरकार पहले से बहुत ज़्यादा सरकारी ख़र्च कर रही है. इस बात को ऐसे भी समझ सकते हैं कि निजी क्षेत्रों की विकास दर लगभग नहीं के बराबर हो गई है.

सरकार ने अर्थव्यस्था को पटरी पर लाने के लिए कुछ क़दम उठाए थे जैसे कॉरपोरेट टैक्स में कटौती की गई थी. इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक ने कई बार ब्याज़ दरों में कटौती की है. लेकिन रेट कट करने से कुछ ज़्यादा फ़र्क नहीं पड़ेगा.

दरअसल, आरबीआई तो ब्याज़ दरों में कटौती कर सकता है लेकिन जब तक बैंक अपनी ब्याज़ दरें नहीं घटाएंगे तब कुछ असर नहीं दिखेगा. बैंक भी ब्याज़ दरें इसलिए नहीं काट रहे हैं क्योंकि वो जिस दर पर पैसा उठा रहे हैं, वह बहुत ज़्यादा है और यह तब तक कम नहीं होगा जब तक सरकारी ख़र्च कम नहीं होगा क्योंकि सरकार भी बाज़ार से ही पैसा उठाती है.

इस तरह के आंकड़ों को देखने के बाद लोगों का अपनी अर्थव्यस्था पर भरोसा कम होने लगा है. ऐसे माहौल में लोग अपने ख़र्चों में कटौती करने लगते हैं.

जब बहुत ज़्यादा लोग अपने ख़र्च में कटौती करने लगते हैं तो फिर यह भी अर्थव्यस्था के लिए मुश्किलें पैदा करने लगता है, क्योंकि जब एक व्यक्ति पैसे ख़र्च करता है तो दूसरा व्यक्ति पैसे कमाता है.

अगर समाज का एक बड़ा हिस्सा पैसे ख़र्च करना कम कर देगा तो इससे लोगों की आय कम होने लगती है और फिर वो लोग भी अपने ख़र्चे कम कर देते हैं.

इस तरह से यह एक चक्र बनता है जिसका बहुत नकारात्मक असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.